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अज्ञात तथ्य: क्या आपने कभी सोचा है कि टूथब्रश के ब्रिसल्स में केवल दो ही रंग क्यों होते हैं? अगर नहीं तो आज हम आपको इसके पीछे का कारण बताएंगे।

अज्ञात तथ्य: ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत सुबह सबसे पहले टूथब्रश से करते हैं। बाथरूम में रखा टूथब्रश अक्सर रंगीन होता है। जब भी हम किसी दुकान, मेडिकल स्टोर या मॉल में टूथब्रश खरीदने जाते हैं तो वहां हमें कई तरह के टूथब्रश देखने को मिलते हैं।
आज बाजार में चारकोल, बांस, अल्ट्रा सॉफ्ट और स्लिम सॉफ्ट जैसे कई तरह के टूथब्रश उपलब्ध हैं। अगर आपने ध्यान दिया हो तो देखा होगा कि टूथब्रश के ब्रिसल्स भी अलग-अलग रंग के होते हैं। कभी-कभी बाल एक ही रंग के होते हैं, और कभी-कभी वे बहुरंगी होते हैं। इन्हीं में से एक है दो रंग का टूथब्रश, जो लगभग हर घर में देखा जा सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि टूथब्रश के ब्रिसल्स में केवल दो ही रंग क्यों होते हैं? अगर नहीं तो आज हम आपको इसके पीछे का कारण बताएंगे।
कारण क्या है?
सोशल मीडिया पर की गई कई रिपोर्ट्स और दावों के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि 3500 से 3000 ईसा पूर्व के दौरान बेबीलोन और मिस्र के लोग भी दांत साफ करने के लिए टूथब्रश जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करते थे। उस समय लोग लकड़ी की पतली टहनी को चबाकर उसके सिरे को नरम कर लेते थे और उससे अपने दाँत साफ़ करते थे। कहा जाता है कि आधुनिक टूथब्रश का पहला डिजाइन साल 1780 में तैयार किया गया था, जिसका श्रेय अंग्रेजी उद्यमी विलियम एडिस को दिया जाता है।
कहा जाता है कि जेल में सज़ा काटते समय उन्होंने जानवरों के बालों को खाने की हड्डी से जोड़कर एक टूथब्रश जैसा मॉडल बनाया था. जेल से बाहर आने के बाद उसने यह धंधा शुरू कर दिया. बाद में इसका अमेरिका में पेटेंट कराया गया और वर्ष 1844 में आधुनिक टूथब्रश का आविष्कार हुआ।
अगर बात करें दो रंग के ब्रिसल्स वाले टूथब्रश की तो इसकी भी एक खास वजह है। दरअसल, ब्रिसल्स के ऊपरी हिस्से को अलग रंग दिया जाता है ताकि लोगों को संकेत दिया जा सके कि उन्हें समान मात्रा में टूथपेस्ट लगाना चाहिए। पूरे ब्रिसल्स पर टूथपेस्ट लगाना सही तरीका नहीं माना जाता है। बहुत ज्यादा टूथपेस्ट लगाने की जरूरत नहीं होती और इससे टूथपेस्ट की अनावश्यक बर्बादी होती है।











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