60,000 साल पहले भी इंसान करते थे एडवांस प्लानिंग, जहरीले तीरों ने दिया सबूत, वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा!

क्या आप सोच सकते हैं कि लगभग 60,000 साल पहले इंसान इतने बुद्धिमान और चतुर थे कि वे ज़हरीले तीरों से शिकार करते थे? हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जिसने मानव इतिहास को देखने का हमारा नजरिया ही बदल दिया है। इस खोज से पता चलता है कि मनुष्य बहुत पहले से ही सोच-समझकर शिकार करने की कला में माहिर थे।

दरअसल, यह चौंकाने वाली खोज दक्षिण अफ्रीका के क्वाज़ुलु-नटाल प्रांत में स्थित उम्हलातुजाना रॉक शेल्टर नामक जगह पर हुई है। यहां वैज्ञानिकों को क्वार्ट्ज पत्थर से बने तीर के निशान मिले, जिन पर जहर के स्पष्ट निशान पाए गए। यह शोध स्वीडन और दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया था और इसे प्रतिष्ठित जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित किया गया था। People.com की रिपोर्ट में भी इस खोज की जानकारी दी गई है.

तीरों पर लगा जहर क्या दर्शाता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन तीरों पर लगाया गया जहर शिकार को तुरंत नहीं मारता था, बल्कि धीरे-धीरे उसे कमजोर कर देता था। इससे जानवर भाग नहीं पाता था और शिकारी उसे आसानी से पकड़ लेते थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि उस युग के लोग न केवल ताकत से, बल्कि रणनीति और धैर्य से भी शिकार करना पसंद करते थे।

जहर किस पौधे से बनाया गया था?
शोधकर्ताओं ने देखा कि इन तीरों पर इस्तेमाल किया गया जहर बूफोन डिस्टिचा नामक एक स्थानीय पौधे से बनाया गया था। यह पौधा आज भी दक्षिण अफ्रीका में पाया जाता है और बेहद जहरीला माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार,

. यह जहर चूहों को 20-30 मिनट में मार सकता है।
. मनुष्यों में, यह मतली, दृष्टि समस्याएं और मांसपेशियों में कमजोरी का कारण बन सकता है।

आश्चर्य की बात यह है कि यही जहर बाद के ऐतिहासिक काल में इस्तेमाल किये गये तीरों पर भी पाया गया है। इस खोज से पहले वैज्ञानिकों का मानना ​​था कि ज़हरीले तीरों का इस्तेमाल 4,000 से 8,000 साल पहले शुरू हुआ था। ऐसे तीर मिस्र और दक्षिण अफ्रीका में पाए जाते थे। लेकिन ये 60,000 साल पुराने तीर इस सोच को पूरी तरह से बदल देते हैं और साबित करते हैं कि इंसान बहुत पहले से ही उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे।

मिट्टी में कैसे टिक रहा है जहर?
एक और आश्चर्य की बात यह है कि वैज्ञानिकों को तीरों पर जो जहर मिला वह हजारों साल बाद भी सुरक्षित रहा। रासायनिक परीक्षण से पता चला कि ये पदार्थ मिट्टी में लंबे समय तक स्थिर रह सकते हैं। यह खोज भविष्य में पुरातत्व के कई और रहस्यों को सुलझाने में मदद कर सकती है।

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