शाकाहार छोड़ा और बन गए ‘मांसाहारी’, अब सिर्फ मांस और मक्खन खाकर खुद को सबसे फिट होने का दावा, फल और सब्जियों से हो जाते हैं बीमार!

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लंदन की रहने वाली 41 साल की लौरा स्लियाज़ाइट ने 13 साल तक शाकाहारी रहने के बाद अब पूरी तरह से मांस और मक्खन को अपना लिया है। उनका दावा है कि फलों और सब्जियों से उनकी सेहत में सुधार होता है और वह अब पहले से ज्यादा स्वस्थ हैं।

फल और सब्जियों से हो जाती है बीमार, अब मांस और मक्खन खाती है महिला, कभी थी शाकाहारी!

आजकल खान-पान को लेकर दुनिया भर में नए-नए प्रयोग हो रहे हैं, जहां कुछ लोग पूरी तरह से शाकाहारी बन रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इसके ठीक विपरीत रास्ता चुन रहे हैं। लंदन में रहने वाली 41 साल की आईटी प्रोफेशनल लॉरा स्लियाजाइट ने भी कुछ ऐसा ही किया। हाल ही में उन्होंने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने पोषण विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. करीब 13 साल तक शाकाहारी जीवनशैली अपनाने के बाद लॉरा ने अब पूरी तरह से ‘कार्निवोर डाइट’ अपना ली है, जिसमें वह सिर्फ मांस, मछली, अंडे और बटर केक खाती हैं। उनका कहना है कि फल और सब्जियां अब उनके शरीर को बीमार बना रही हैं। लॉरा का दावा है कि जब उन्होंने ढाई साल पहले यह डाइट शुरू की थी तो उन्होंने इसे सिर्फ 30 दिनों के लिए आजमाने के बारे में सोचा था।

लॉरा ने कहा कि एक बार जब उन्होंने इसे खाना शुरू किया और इसके अद्भुत फायदे देखे तो उन्होंने इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लिया। लॉरा के मुताबिक, “जब मैं शाकाहारी थी, तो मैं अवसाद, जोड़ों के दर्द, पुरानी थकान, एक्जिमा, मसूड़ों से खून आना और माइग्रेन जैसी कई समस्याओं से जूझ रही थी। यहां तक ​​कि मैं एनीमिया की भी शिकार हो गई थी।” उन्होंने बताया कि मांसाहारी आहार शुरू करने के बाद उनकी ऊर्जा का स्तर स्थिर हो गया है, अस्वास्थ्यकर भोजन के प्रति उनकी इच्छा खत्म हो गई है और उनकी त्वचा संबंधी समस्याएं भी ठीक हो गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि लौरा ने पिछले साल प्रयोग के तौर पर कुछ सब्जियां और फल दोबारा खाने की कोशिश की, लेकिन उसके पुराने लक्षण तुरंत वापस आने लगे। उनका मूड खराब हो गया, एक्जिमा फिर से बढ़ गया और उन्हें बार-बार भूख लगने लगी।

लॉरा ने आगे कहा कि जब पुरानी समस्याएं दोबारा सामने आने लगीं तो उन्हें एहसास हुआ कि उनका शरीर मांस पर ही सबसे अच्छा काम करता है। उनके दैनिक आहार में सुबह अंडे और मक्खन, दोपहर में चिकन लीवर और रात के खाने में मक्खन और नमक के साथ बीफ जॉइंट शामिल होता है। उन्होंने हाल ही में छह दिन का ‘सार्डिन फास्ट’ भी किया, जहां उन्होंने केवल मछली खाई, जिससे उन्हें मानसिक स्पष्टता और बेहतर नींद मिली। आलोचकों द्वारा ‘दिल का दौरा’ पड़ने की चेतावनी के बावजूद लौरा का मानना ​​है कि अब वह पहले से कहीं अधिक ऊर्जावान महसूस करती हैं। वह किराने के सामान पर हर महीने लगभग 26,000 रुपये से 31,000 रुपये खर्च करती हैं। वह कहती हैं कि बजट पर बने रहने के लिए, वह महंगे स्टेक के बजाय ग्राउंड बीफ़ और पोषक तत्वों से भरपूर मांस चुनती हैं।

लेखक के बारे में

ऑथरीमजी

निरंजन दुबे

न्यूज18 हिंदी (नेटवर्क 18) डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत। इंटरनेशनल, वेब स्टोरी, ऑफबीट, रीजनल सिनेमा के प्रभारी। डेढ़ दशक से अधिक समय से मीडिया में सक्रिय। नेटवर्क 18, टाइम्स ग्रुप के अलावा…और पढ़ें

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