वायरल शादी का कार्ड: क्यूआर कोड वाला यह वेडिंग कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कार्ड में शादी की पूरी जानकारी के साथ एक क्यूआर कोड भी दिया गया है, जिसे स्कैन करते ही दूल्हा-दुल्हन की यूपीआई आईडी खुल जाती है। इसके जरिए शगुन और मुंह दिखाई की रस्म को ऑनलाइन पूरा किया जा सकता है.
कार्ड छपवाने वाले युवक का कहना है कि कई बार लोग शादी में शामिल होने के लिए यात्रा के दौरान सड़क हादसे का शिकार हो जाते हैं, इसलिए उन्होंने यह अनोखा तरीका अपनाया है ताकि रिश्तेदारों को शादी में शामिल होने के लिए मजबूर न होना पड़े.
यह मामला बागपत जिले के दोघट थाना क्षेत्र का है. यहां कस्बे में रहने वाले एक युवक ने शादी से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर एक नई पहल की है.
इस सोच के पीछे का मकसद जहां लोगों को सड़क हादसों से बचाव के प्रति जागरूक करना है, वहीं समय और पैसे की बचत करना भी इस पहल का अहम मकसद बताया जा रहा है.
दोघट कस्बे के एक निवासी ने अपनी बहन और अपनी शादी के निमंत्रण कार्ड पर क्यूआर कोड छपवाने का अनोखा फैसला लिया है।
शख्स के मुताबिक, उसकी बहन की शादी 7 फरवरी को है, जबकि उसकी खुद की शादी 8 फरवरी को होगी. अब दोनों शादी के कार्ड पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके कन्यादान और दुल्हन के चेहरे का शगुन ऑनलाइन भेजा जा सकता है।
शख्स का कहना है कि अक्सर रिश्तेदारों और परिचितों को शादियों में शामिल होने के लिए दूर-दूर जाना पड़ता है और इस दौरान कई सड़क दुर्घटनाएं हो जाती हैं, जिससे खुशी का मौका गम में बदल जाता है. इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह पहल की है, ताकि दूर रहने वाले रिश्तेदार बिना यात्रा किए सुरक्षित रूप से अपनी शुभकामनाएं और शगुन भेज सकें।
शख्स का कहना है कि जो रिश्तेदार किसी कारण से शादी में शामिल नहीं हो सकते हैं या दूरी और व्यस्त कार्यक्रम के कारण नहीं आ पा रहे हैं, वे क्यूआर कोड को स्कैन करके आसानी से कन्यादान या मुंह दिखाई शगुन ऑनलाइन भेज सकते हैं।
इससे उनकी यात्रा संबंधी सुरक्षा सुनिश्चित होगी और अनावश्यक यात्रा खर्च भी बचेगा। इस पहल के तहत इस शख्स ने पंजाब, चंडीगढ़, पानीपत समेत दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले रिश्तेदारों को व्हाट्सएप के जरिए डिजिटल कार्ड भेजे हैं, जबकि खुद आसपास के इलाकों में जाकर कार्ड दिए हैं।
इस नई और अलग सोच को इलाके में खूब सराहना मिल रही है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पहल समय की मांग है और समाज को एक सकारात्मक संदेश देती है.











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