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चौकसी नाथ मंदिर शाहजहाँपुर: शाहजहाँपुर के प्राचीन चौकसी नाथ मंदिर में महादेव का ऐसा चमत्कार देखने को मिलता है, जिसे देखकर लोग दांतों तले उंगलियाँ दबा लेते हैं। यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग का रंग रहस्यमय तरीके से नीला, काला और भूरा हो जाता है। 9 पीढ़ियों तक एक ही परिवार द्वारा संरक्षित इस मंदिर में दो शिवलिंग एक साथ जुड़े हुए हैं। मान्यता है कि सूखे की स्थिति में शिवलिंग को पानी में डुबाने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और बारिश करते हैं। आस्था और रहस्य का यह संगम श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल का विषय है।
शाहजहाँपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले का चौक क्षेत्र आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र बना हुआ है। यहां स्थित चौकसी नाथ मंदिर शिव भक्तों की अपार श्रद्धा का प्रतीक है। इस प्राचीन मंदिर की सबसे बड़ी अलौकिक विशेषता यह है कि यहां दो शिवलिंग एक ही स्थान पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है और समय-समय पर अपना रंग बदलता रहता है।
एक ही परिवार 9 पीढ़ियों से सेवा कर रहा है
मंदिर के मुख्य पुजारी विजय गिरि ने बताया कि इस दिव्य स्थान का इतिहास उनके पूर्वज पंडित सुखलाल से जुड़ा है, जिन्हें स्वयं भगवान भोलेनाथ ने दर्शन दिये थे. वर्तमान में उनकी नौवीं पीढ़ी इस मंदिर की सेवा और संरक्षण कर रही है। नौ पीढ़ियों से एक ही परिवार द्वारा संरक्षित इस मंदिर में आने वाले भक्तों का मानना है कि महादेव के दर्शन मात्र से उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहता है।
शिवलिंगों के रंग बदलने का रहस्य
चौकसी नाथ मंदिर की सबसे रहस्यमयी बात है यहां के शिवलिंगों का बदलता रंग। मंदिर में आने वाले भक्तों और प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि यह शिवलिंग कभी नीला, कभी भूरा और कभी काला दिखाई देता है। महादेव के इस अद्भुत चमत्कार को देखने और जलाभिषेक करने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं।
सूखा पड़ने पर महादेव का सहारा, बारिश की अनोखी परंपरा!
इस मंदिर से लोक कल्याण की एक अनूठी परंपरा जुड़ी हुई है। पुजारी के मुताबिक, जब भी इलाके में भयंकर सूखा पड़ता है तो दोनों शिवलिंग पूरी तरह पानी से भीग जाते हैं। लोक मान्यता है कि ऐसा करने के तुरंत बाद क्षेत्र में बारिश अवश्य होती है। ऐसी अटूट मान्यता है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय स्थानीय लोग आश्रय के लिए सबसे पहले चौकसी नाथ के पास ही आते हैं।
अमावस्या पर भव्य मेले का आयोजन होता है
यहां अमावस्या का दिन विशेष हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जहां हजारों भक्त महादेव के दर्शन के लिए आते हैं। भक्तों का मानना है कि संकट के समय भोलेनाथ के दर पर माथा टेकने से हर बाधा दूर हो जाती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
लेखक के बारे में

राहुल गोयल हिंदी में न्यूज 18 हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं। उनके पास मीडिया उद्योग में 16 वर्षों से अधिक का अनुभव है, उनका ध्यान हमेशा नए मीडिया और उसके… पर रहता है।और पढ़ें











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