दुनिया में सबसे महंगा रेशम बनाने वाली मकड़ी खूबसूरती में राजा को भी टक्कर देती है।

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आज तक आपने यही सुना होगा कि तसर रेशम सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला रेशम है। इसे रेशम का कीड़ा कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक मकड़ी भी है जो इस रेशम से प्रीमियम क्वालिटी का रेशम भी बनाती है।

दुनिया में सबसे महंगा रेशम बनाने वाली मकड़ी राजा को भी देती है टक्कर!स्पाइडर सिल्क दुनिया के बेहतरीन सिल्क में शामिल है (इमेज- फाइल फोटो)

जब हम रेशम के बारे में बात करते हैं, तो सबसे पहले दिमाग में शहतूत रेशम और तसर रेशम का नाम आता है। तसर रेशम भारत में बहुत पसंद किया जाता है क्योंकि यह मजबूत, चमकदार और पर्यावरण के अनुकूल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रकृति ने इससे भी कई गुना बेहतर रेशम छिपा रखा है?

जी हां, हम बात कर रहे हैं गोल्डन सिल्क ऑर्ब-वीवर स्पाइडर की, जिसका वैज्ञानिक नाम ट्राइकोनफिला क्लैविप्स या नेफिला है। इस मकड़ी का रेशम न केवल तसर रेशम से बेहतर है बल्कि इसे दुनिया का सबसे दुर्लभ और महंगा प्राकृतिक रेशम भी माना जाता है।

तसर को टक्कर देता है
यह मकड़ी मुख्य रूप से मेडागास्कर, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के जंगलों में पाई जाती है। मादा मकड़ियाँ बहुत बड़ी होती हैं, लगभग 4-5 सेमी लंबी, और उनके जाले सुनहरे रंग के होते हैं, जो सूरज की रोशनी में चमकते हैं। इस सुनहरे रंग का रहस्य प्राकृतिक रंगद्रव्य जैसे कैरोटीनॉयड और अन्य यौगिकों में छिपा है, जो रेशम को प्राकृतिक सुनहरा रंग देते हैं। इसमें कोई डाई नहीं लगाई जाती, फिर भी यह रेशम सोने की तरह चमकता है। तसर रेशम की तुलना में गोल्डन स्पाइडर रेशम विशेष है। तसर रेशम जंगली कीड़ों (जैसे एंथेरिया माइलिटा) से बनाया जाता है और मजबूत होता है, लेकिन मकड़ी रेशम की ताकत इससे कई गुना अधिक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, गोल्डन ऑर्ब-वीवर का ड्रैगलाइन सिल्क स्टील से 5 गुना मजबूत और केवलर (बुलेटप्रूफ जैकेट की सामग्री) से भी बेहतर है। इसकी लोच इतनी अधिक होती है कि यह आसानी से टूटता नहीं है। बायोमटेरियल विज्ञान में वैज्ञानिक इसे ‘सुपरमटेरियल’ कहते हैं।

चार साल की मेहनत का नतीजा
इस रेशम की सबसे बड़ी उपलब्धि 2009 में मिली जब ब्रिटिश और अमेरिकी उद्यमियों साइमन पीयर्स और निकोलस गोडले ने 80 लोगों की टीम के साथ मेडागास्कर में 4 साल तक काम किया। उन्होंने 1.2 मिलियन से अधिक मादा मकड़ियों से रेशम निकाला (बाद में मकड़ियों को जंगल में छोड़ दिया गया) और मकड़ी के रेशम से बनी दुनिया की सबसे बड़ी शॉल और टोपी बनाई। कपड़ा पूरी तरह से प्राकृतिक है, कोई रंग नहीं है, और इसे विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय (वी एंड ए) में प्रदर्शित किया गया था। इसे दुनिया का सबसे दुर्लभ और महंगा कपड़ा माना जाता है।

यह इतना महंगा क्यों है?
एक मकड़ी बहुत कम रेशम पैदा करती है – एक दिन में केवल कुछ मीटर। रेशम का एक टुकड़ा बनाने में लाखों मकड़ियाँ लगती हैं। साथ ही, मकड़ियाँ नरभक्षी होती हैं, इसलिए उन्हें अलग रखना पड़ता है। इसे प्राकृतिक रूप से एकत्र करना बेहद कठिन है। यही कारण है कि मकड़ी रेशम का व्यावसायिक उत्पादन अभी तक संभव नहीं हो सका है। वैज्ञानिक इस रेशम के कई उपयोग तलाश रहे हैं। यह बायोकम्पैटिबल है यानी शरीर में आसानी से स्वीकार हो जाता है। इससे तंत्रिका मरम्मत, ऊतक इंजीनियरिंग और यहां तक ​​कि बुलेटप्रूफ जैकेट भी बनाए जा सकते हैं।

लेखक के बारे में

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संध्या कुमारी

मैं न्यूज 18 में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहा हूं. रीजनल सेक्शन का मकसद आपको राज्यों में होने वाली उन घटनाओं से रूबरू कराना है, जिन्हें सोशल मीडिया पर पसंद किया जा रहा है. ताकि आप कोई भी वायरल कंटेंट मिस न करें।

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दुनिया में सबसे महंगा रेशम बनाने वाली मकड़ी राजा को भी देती है टक्कर!

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